" देखो रामायण नहीं राम चरित मानस पढी होगी तुमने । रामायण तो घरों में बहुत कम होती पर मानस तो लगभग हर घर में पाई जाती । ' दिनकर जी को तो तुमने पढ़ा ही होगा कुरुक्षेत्र रश्मिरथी जैसे काव्य सो काव्य .. गद्य साहित्य भी गजब का लिखा संस्कृति के चार अध्याय शुद्ध कविता की खोज आदि ... अच्छा पुराने गाने पसंद है तुम्हे ? मैंने जो लिखा था ' कई बार यूं ही देखा है ' वो तुम्हे मुझसे ही पहली बार पता चला था न ... कैसा लगा बताओ " बकर बकर करते करते उसने देखा कि वो चेहरे पर मुस्कान , आँखों में मन की चीज मिलने की खुशी की चमक लिए अपनी चेहरा हाथों में टिकाये बस उसे ही देख रही है ... उसकी आँखों में झांकते ही उसे सारे उत्तर मिल गए । पर एक पल उसकी आँखों में देखने के बाद उसने नजर हटा ली ... परिवार , समाज , जाति , कुल , गोत्र , आर्थिक स्थिरता , कुलीनता संबंधी भावी प्रश्नों ने उसके दिमाग में जगह बनाना शुरू कर दिया था .... - मलंग ©
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