मैं कैसे अस्तित्व में आया ये कोई लम्बी महान और बड़ी कहानी नहीं है और न ही किसी प्रसव काल से जुडी , दो भिन्न व्यक्तित्वों शरीरों आत्माओं को स्वयं में समिष्ट किये मुझे आगे बढ़ना था , पर वो होता है न आपके प्रशंसक आलोचक दोनों ही मैदान में होते हैं , मेरे भी थे । अब मुझ पर बोझ बढ़ाया जा रहा था आलोचक ढोना चाहते थे मुझ पर अपनी परम्पराओं प्रतिष्ठाओं को तो प्रशंसक महानताओं को अपेक्षाओं को ...मैं अब रेंगते हुए बढ़ रहा था लेकिन वो हार गया , वो तड़प कर रह गयी , और मुझे बे मौत मरना पड़ा । अब मेरे नसीब में बस दोनों के आंसू रूपी कफ़न था जिसे उन्होंने ' दोस्ती ( lets remain friends ) ' का नाम दे दिया ..... - ' ढाई अक्षर की लाश ' आत्म कथा से ©
.............कब यहां अमर विस्वास , अमिट है कब आस्था ? बस एक शून्य जिसमें होता सब कुछ विलीन , आबद्ध परिस्थिति - मनोवृत्ति की सीमा से , मै जो लिखता वह सब कितना अर्थहीन !
Tuesday, December 24, 2013
Thursday, December 19, 2013
कोशिश करने वालों की ...
हिन्दी साहित्य में गजब रूचि थी बन्दे की , प्रेरणादायक कविता ख़ास तौर से ' कोशिश करने वालों की हार नहीं होती है ' तो श्री मुख से ऐसे निकलती थीं जैसे प्लेटफार्म पर ' चाय गरम चाय ' का स्वर ... बी.ए. हिन्दी फर्स्ट इयर की बात है ... नीली साईकिल वाली लड़की पर दिल आ गया पर कहने मे डरे ... गर्मी में ताल पोखरे सूख जाते वैसे ही आत्म विश्वास सूख जाए .... दोस्त के काम दोस्त न आये ऐसा हो सकता है भला ... आत्म विश्वास प्रेम की महानता के झाड पर चढ़ा कर ' कोशिश करने वालों की हार नहीं होती है ' का इंजेक्शन लगाया हमने तो बन्दे में आत्म विश्वास बरसात में शहर में भरे पानी की तरफ उफनाने लगा .... ' हे पिकबयनी हे मृगनयनी ' घोट कर पीगया बंदा , खुश इतना कि ऐसा लगने लगा कि ये मुस्कराहट महानगर की स्ट्रीट लाईट की तरह अब शायद कभी न बंद हो ... अगले दिन हिन्दी की क्लास नहीं आया बाहर मिला तो चेहरे की रोशनी ऐसे गायब जैसे मंत्री आने के बाद एक महीने तक गाँव में बत्ती न आई हो ... बहुत पूंछने पर बोला हमारी समझ में आ गया कि कोशिश करने वालो की न हार होती है न लड़की .. मार होती है , वो नीली साईकिल जीव विज्ञान वाली थी पिकबयनी मृगनयनी सुनते ही ' रसीद ' दे दी ... ©