बिना मडगार्ड बिना पैडल की साइकिल के डंडे पर बैठी नन्ही सी जान आज बहुत खुश थी ... प्लास्टिक का बैट बाल जिसकी चाहत ने उसे पिछले महीनों में कई बार उसे पिटवाया, रुलाया था आज पूरी हो गयी थी .. बाप - बेटे चहकते बतियाते जा रहे थे लेकिन फिर अचानक बाप चुप हो गया .. मासूम ने बस इतना ही पूछा था ' बापू तू रोज गुलाब क्यों नही बेंचे ? ' " - ब्रह्म राक्षस ©
.............कब यहां अमर विस्वास , अमिट है कब आस्था ? बस एक शून्य जिसमें होता सब कुछ विलीन , आबद्ध परिस्थिति - मनोवृत्ति की सीमा से , मै जो लिखता वह सब कितना अर्थहीन !
Saturday, February 14, 2015
बदलाव
हाँ तो बात उस दिन की है .. जब प्रस्तोता ने नए बनाये पकवान परसने सरीखे उल्लास और उत्साह से कहा '...अब देखिये विजयी पार्टी के प्रमुख प्रवक्ता का विजय के बाद सबसे पहला और एक्सक्लूसिव साक्षात्कार ' इतना सुनना था कि मुझे अलग रख दिया गया .. मैं खुश था क्योंकि जिस विश्वास स्थायित्व और सुकून की तलाश मुझे हमेशा से थी मेरे जीवन में आते हुए से लग रहे थे । लेकिन उस पहले सवाल के जवाब पर प्रवक्ता ने जैसे ही कहा ' हिंदी के सबसे अधिक व्यस्ततम और लोकप्रिय कवि होने के नाते 'मेरी '... ' मुझे झठ से उठा लिया गया .. स्थायित्व , सुकून और ' विश्वास ' ओझल हो चुके थे और एक निराशा लिए उन हाथों से ' प्रोग्राम चेंज ' बटन फिर से बार बार दबाई जा रही थी । - एक रिमोट की आत्म कथा से ..... - © ब्रह्म राक्षस