Wednesday, August 27, 2014

जिन्दा

मंदिर जाते समय गाँव से गुजरते एक रास्ते पर .. 3-4 साल की उमर
होगी , बिखरे बाल , कपड़ों के नाम पर मैले कुचैले चीथड़े , और एक
चोटिल हाथ जिस पर ढंग का प्लास्टर भी नहीं था । बीच सड़क
पर अपनी बहन के साथ चलते चलते अचानक बाईं तरफ भागा पर बाईक
देख कर फिर दाएं को पलटा... मेरी जान सूख गयी .. आम तौर पर
60- 70 चलने वाला मैं 50 पर चल रहा था पर तब भी क्लिच गियर
ब्रेक के सारे संयोजन पूरे नियंत्रण , तत्परता और शक्ति के साथ करने
पड़े ... अब वो मासूम गाडी के बिलकुल सामने हाथ में खाने
वाला पीला पीला ' पोंगा ' थामे तकरीबन 3-4 फीट दूर दहशत
से गिरा पड़ा था ... क्या हुआ एक पल को कुछ समझ न आया फिर
पीछे से पिलियन की क्रोध भरी आवाज आना और उसका सहमते
डरते हुए भाग खड़ा होना ... ये सुनिश्चित कर रहा था कि ' मैं
अभी जिन्दा हूँ '... - © ब्रह्म राक्षस

Saturday, August 23, 2014

जीत


कमाऊ पति की पत्नी  और दो प्यारे गोल मटोल बच्चों की माँ थी । लेकिन जब वो मिला तो सब भूल गई ... प्रेम में पड़ गयी अब न उसे घर की सुध रहती न द्वार की । और एक दिन लड़के ने उसे बुला ही लिया मिलने ... दोनों मिले ,  नजरे नज़रों में उतरीं , हाथों ने हाथ थामे फिर लडके ने उसको भविष्य दिखाया और भविष्य में था एक ' सिलवट भरा बिस्तर ' .. पहले बरसात और उसके बाद की धूप सी चटख हो गयी वो ... फ़नक कर ऐसे भागी जैसे कोई बुरा सपना टूटा हो । ... अब लड़का बंद अँधेरे कमरे में बैठा था  किसी आशा किसी प्रतीक्षा किसी पश्चाताप में नहीं ... बस इस अनोखे सत्य के साथ कि ' अच्छाई पर कभी कभी बुराई भी जीतती है ' ... © ब्रह्म राक्षस