अँधेरे गहरे कुएं में
बाल्टी गिरती है
और गूंजती है
छपाक की आवाज !
फिर
खीचना पड़ता है
जिसे पूरे जतन से
निकालने को
एक और अदद भरी बाल्टी
बस बिलकुल इसी तरह
ह्रदय के कुँए में
गूँज उठता है
तुम्हारा नाम
फिसलती साँसों को जकड़ कर
खीचता हूँ
ताकि निकल सके
एक और दिन । - ब्रह्म राक्षस ©
.............कब यहां अमर विस्वास , अमिट है कब आस्था ? बस एक शून्य जिसमें होता सब कुछ विलीन , आबद्ध परिस्थिति - मनोवृत्ति की सीमा से , मै जो लिखता वह सब कितना अर्थहीन !
Tuesday, September 23, 2014
एक और कविता
Thursday, September 18, 2014
आदमखोर
ज्वाईनिंग लेटर लेने के लिए रोज की तरह आफिस में शांतिपूर्ण भीड़ लगी थी । इस में आफिस में सब अपने मन चाहे शरीर के लिए आवेदन करते और साहब उनको उनके कर्मो के हिसाब से ही अगला जन्म आवंटित करते थे । आज इंसान के रिक्त पदों की संख्या कम थी इसलिए मनुहार गुहार भी चलन में थी , इसी क्रम में ' सर मैं पिछले जन्म में बाघ था और मुझे बहुत बुरी तरह गोलियों से छलनी कर लाठी डंडो से पीट कर , जिन्दा भून दिया गया था मैंने बहुत कष्ट सहे इसलिए मुझे इंसान बनाया जाए । ' एक आत्मा ने निवेदन किया । साहब ने उसकी फाईल देखना शुरू ही किया था तभी पीछे से दूसरी आत्मा बोली ' सर इसे नहीं इंसान मुझे बनाईये क्योंकि मेरे साहस और युक्ति के बल पर ही ये मारा जा सका था और लोगों को इसके आतंक से मुक्ति मिली , ये इंसान बनने का हकदार नहीं ये तो आदमखोर था । ' अब साहब मुश्किल में पड़ गए थे क्योंकि पहली आत्मा ने सवाल किया था ' सिर्फ आदमखोर होना अपराध होता क्या सर ? फिर भूख मिटाने के लिए आदमी क्यों ' हलाल ' किया करता है ? ' - ब्रह्म राक्षस ©
Tuesday, September 16, 2014
मिठास
' प्रसूता क्या जानबूझ कर बच्ची को जन्म देती ... नारी को जननी मानते है देवी मानते हैं ... जब कल को नारी नहीं होगी तो संसार में सृजन कैसे होगा ... पहले मेल फीमेल का रेशियो इतना था अब कम होकर इतना हो गया .. ' लड़की कॉफी टेबल पर सामने बैठे लडके को सुनाये जा रही थी । लड़के ने शुगर क्यूब की तरफ इशारा किया तो लड़की और भड़क गयी , सारी पुरुष जाति उसके निशाने पर आ गयी , काफी सुनाने के बाद लड़की ने लडके पर ही सवाल दाग दिया ' अच्छा तुम इकलौते हो माँ बाप के , कल को अगर तुम पिता बनो और लड़की हो तो क्या करोगे .. बोलो ? ' ... कॉफी मग से बाहर झांकते हुआ लड़का बोला ' करना क्या है .. या तो तुम उसे नाम दे देना नहीं तो मैं दे दूंगा तुम्हारा नाम ' ... लड़की झेपी मुस्कुराई और कॉफी मग को होठो से लगा लिया अब उसकी चमकती आँखे शायद कॉफी की मिठास को बयां कर रहीं थी । - ब्रह्म राक्षस ©
एक खबर
नेता जी की चुनावी सभा थी । व्यवस्था हो रही थी विकास सड़को के गड्डे भर रहा था , रोशनी सभा स्थल पर लगे जनरेटर्स से ईंधन पी रही थी , पूंजी निवेश मंच में एसी कूलर लगा रहा था , गरीबी बसों गाड़ियों में भर भर लाई जा रही थी , अशिक्षा पूड़ी सब्जी के पैकेट बना रही थी और स्वास्थ्य टेंट से दूर खड़ी दो गाड़ियों में भरी बोतल पाउचो की रखवाली कर रहा था । इन्फ्रास्ट्रक्चर बड़े से मैदान के एक छोटे से हिस्से को छाया दे रहा था । फिर मंत्री जी आये धर्मनिरपेक्षता - साम्प्रदायिकता - जातिवाद ...... हुंकार - टंकार , माला - मुकुट , तलवार - गदा बन कर छाये रहे और सभा समाप्त हुई हुई । अगले दिन में बिके हुए सच में सबसे ऊपर बड़ी लिखावट और 20-25 पंक्तियों में छपा था ' भारी जन समूह - सफल सभा ' जिसकी नीव में थे क़त्ल , लूट , बलात्कार और बेरोजगार की आत्म हत्या के कुछ्ले दबे हुए 4 पंक्ति के सच । - ब्रह्म राक्षस ©
दारोगा
शाम को मैदान से आने के बाद सीधे अपने कमरे में चला गया , नहा धोकर स्वाध्याय करने बैठ गया , व्यस्तता परीक्षा के दिनों की तरह खाना भी अपने कमरे में लाकर खा लिया । फिर सुबह रोज की तरह व्यायाम नित्य कर्म करके अखबार नाश्ता भी बाहर बरामदे में कर लिया । चुपचाप कचहरी को निकलने वाला था कि वो उम्र दराज , चश्मा लगा चेहरा जिसके सामने मैं कल शाम से नहीं आया था दरोगा के जैसे बोल उठा ' दाईं आँख को क्या हुआ छोटी छोटी सी क्यों लग रही ... इधर आ जरा ' । अब झूठ फिर हकला रहा था ' म्म म्म माँ कुछ नहीं हुआ ' । - ब्रह्म राक्षस ©
Monday, September 15, 2014
दस गाँव भोज
6-7 साल की देह को आज थोड़ी साफ़ और सिली चिरकोटी पहनने को मिल रही थी । आज जमीदार के यहाँ बरसी पर दस गाँव भोज था , बापू और बड़के दादा को दूसरा काम है इसलिए ' नन्हे ' और माँ जायेंगे । आज पहली बार नन्हे को ऐसी दावत देखने का अवसर मिला था तो बहुत खुश था । चलने को हुए तो माँ ने इसे एक डंडा पकड़ा दिया और उत्सुकता भरे प्रश्न ' ई काहे अम्मा ? ' को अनसुना कर हाथ थाम कर तेजी से आगे बढ़ गयी । ज़मीदार का आहाता दिखना शुरू नहीं हुआ था पर खाने की खुसबू आ रही थी , बाल चपलता को थाम पाना अब माँ के लिए मुश्किल होता जा रहा था ... खैर अब दोनों माँ बेटा अब जूठी पत्तलो , टूटे कुल्हड़ों के ढेर के पास खड़े थे , माँ जल्दी जल्दी अध खाई पूड़ियाँ और ना पसंद आई सब्जी बटोर रही थी ... तभी टूटे कुल्हड़ो में बची खीर को आकर कुत्ते चाटने लगे ' ठाड़ काहे हा .. भगा इनका .. यही के मारे तो डंडा दीन रहै ' ....
( एक जीवनी में पढी घटना पर आधारित )
Thursday, September 11, 2014
' इतना खूंखार गिरोह है कि मामला जरा सा इधर उधर हुआ नहीं कि ' पकड़ ' को ख़त्म कर देते हैं आपके बच्चे को छोड़ दिया इसे चमत्कार मानिए .. क्योंकि गिरोह में से किसी ने मदद की इसकी , यकीन मानिए उन दरिंदो से इतनी अच्छाई की उम्मीद हमें नहीं थी it was beyond our expectations .. ' पुलिस अफसर ने अपाहिज बच्चे को परिवार को सौपते हुए कहा । सब खुश , उल्लास से ओत प्रोत थे पर दादा जो कुछ समय पहले दादी की बात ' मैंने कहा था कि पीपल में भगवान् का वास होता है गीता में भगवान खुद कहे हैं कि वृक्षों में मैं पीपल हूँ पर मुझ बुढ़िया की किसी ने ना सुनी ... सारे पौधे उखड़ा दिए ... उसी का फल है ये ... हाय मेरा चिंटू कहा होगा ? ' । पर ' पगला गयी है बुढ़िया नाली नाला गटर सबसे इसके भगवान निकला करते है ' बुदबुदाते हुए कोस रहे थे .. अब नाली से उगते नन्हे पीपल को बड़े गौर से देख रहे थे ... - ब्रह्म राक्षस ©