पुलिस ने क्या गजब की तत्परता दिखाई थी इस बार , सामूहिक बलात्कार - हत्या की गुत्थी बस तीन दिन में सुलझ गयी । महिला स्वयं अभियुक्त के साथ रात में अनजान जगह गयी थी , वहां उसकी हत्या हुई थी बलात्कार नहीं और एक मात्र दोषी पकड़ा जा चुका था । परिणाम स्वरूप प्रति हजार / बलात्कार के आंकड़ो में ' वांछित ' कमी आ गयी । ... और ये अलग बात है कि दबी दबी जुबान में ही सही फिर एक औरत को ' बदचलन ? ' कहा जा रहा था । © - ब्रह्म राक्षस
.............कब यहां अमर विस्वास , अमिट है कब आस्था ? बस एक शून्य जिसमें होता सब कुछ विलीन , आबद्ध परिस्थिति - मनोवृत्ति की सीमा से , मै जो लिखता वह सब कितना अर्थहीन !
Monday, July 21, 2014
बदचलन
सुबह - सुबह
लड़का - हे बेब !
लड़की - एक बार में समझ नहीं आता तुम्हे ...
लड़का - क्या ?
लड़की - Don't call me babe .
लड़का - अच्छा अच्छा sorry ..
लड़की - ठीक है ।
लड़का - अच्छा Hey bomb चलेगा ? ( हँसते हुए )
लड़की - मर जाओ तुम ... Im not replying ..
लड़का - ( फिर से हँसते हुए )अब समझा तुम हनुमान चालीसा क्यों नहीं पढ़ती ..
लड़की आँखे बंद कर के चेहरा घुमा लेती है ... जरूरी थोड़ी न है कि हर बार आखें आंसू ही छिपायें । © - ब्रह्म राक्षस
Sunday, July 20, 2014
मर्यादा
वो रक्त रंजित विदीर्ण शरीर तड़पता रहा रात भर । जीने के लिए .. अपनी असहाय संतानों से एक आख़िरी बार मिलने के लिए और एक चुल्लू पानी के लिए । पर उसे कुछ भी नसीब न हुआ ... सुबह को ' पेट के बल ' पड़ी मिली उसकी लाश और चारों तरफ बिखरा खून लोगों के लिए उसका ' घिसटना ' भर था पर वास्तव में वो छिपाना चाहती थी अपने रात भर नोचे घसोट अंग .. क्योंकि जानती थी वो सभ्य समाज का सच ... और इसकी मर्यादा । - © ब्रह्म राक्षस
Friday, July 18, 2014
प्यार
उस दिन ये कालेज से जल्दी घर आ गया , एकांत निजता को पूरी तरह सुनिश्चित करने के बाद इसने अखबार के गड्ड के सबसे नीचे वाले अखबार में छिपी वो पत्रिका निकाली । माथे पर पसीना , चेहरे पर खिलती मुस्कान , दिल की धड़कन और पलटते पन्नो में गजब का सामंजस्य बिठाते हुए फोन पर कन्फर्म किया ' तीन बजे आओगी न ? ' .... ' हाँ और .. ' जवाब पूरा सुने बिना ही इसने फोन काट दिया । अब पूरा समय था इसके पास , मेरे साथ अपने काम में जुट गया , चूंकि पहली बार ये सब कर रहा था इसलिए गजब का नर्वस था , बार बार पसीना पोछता कांपते हाथों से इसने बहुत कुछ किया , पर अति उत्साह अनुभवहीनता ने बेमेल नमक चीनी मसालों का रूप ले रखा था , लेकिन हम जानते थे जिसका जन्म दिन है उसे ये सब नहीं खलेगा , बेजान कहे जाने वाले हम जब खुद में उड़ेले ' प्यार ' को चख पा रहे तो फिर वो तो इसकी ' माँ ' है । - कढाही की आत्मकथा © - ब्रह्म राक्षस