बहुत रसूखदार पत्रकार , साहित्यकार हैं वो, आज बहुत दिन बाद फ़ेसबुक पर लागिन किया तो उनकी प्रोफ़ाईल पर ’ सत्यमेव जयते ’ लगा हुआ हुआ पाया , पिछली बार की हुई बातें याद आ गईं ...
- सर आपके आफ़िस, घर, यहां तक कि प्रोफ़ाईल पिक कवर पिक सब पर फ़ूल रहते हैं लगता है आपको फ़ूल बहुत पसंद हैं ?
- हां !
- कोई खास वजह ?
- कई हैं ?
- मसलन ?
- पुष्प अपने आप में सकारात्मक सृजन का प्रतीक हैं , अनमोल होते हैं , मिट्टी कीचड और गंदगी में खिल आते हैं बस उजाला और पानी मिलता रहे ।
- वाह ! ... सर आपके घर पर फ़ुलवारी है?
- नहीं
- गमले ?
- नहीं ...
- तब तो आप फ़ूल खरीदते होंगे ?
- हां !
......:- ब्रह्म राक्षस ©
- सर आपके आफ़िस, घर, यहां तक कि प्रोफ़ाईल पिक कवर पिक सब पर फ़ूल रहते हैं लगता है आपको फ़ूल बहुत पसंद हैं ?
- हां !
- कोई खास वजह ?
- कई हैं ?
- मसलन ?
- पुष्प अपने आप में सकारात्मक सृजन का प्रतीक हैं , अनमोल होते हैं , मिट्टी कीचड और गंदगी में खिल आते हैं बस उजाला और पानी मिलता रहे ।
- वाह ! ... सर आपके घर पर फ़ुलवारी है?
- नहीं
- गमले ?
- नहीं ...
- तब तो आप फ़ूल खरीदते होंगे ?
- हां !
......:- ब्रह्म राक्षस ©