सुनो मुहम्मद !
सुनो राम !
क्या दे सकते हो
एक वरदान
अगर हां
तो भर दो
हमारे हृदयों को
ममता , प्रेम और वात्सल्य से
ताकि बिना भेद
और संकोच के
लगा सकें
नन्ही जानों को
कलेजों से
बचा सके इन्हें
उन शिकारी नजरों से
इंसान की खाल में दरिंदों से
जो खोजते हैं
' जिंदा ' जिस्म शरीर की भूख के लिए
और उन पिशाचों से
जो पाकर एक ' लाश '
मिटाने लगते हैं अपनी
राजनीतिक , वैचारिक और धार्मिक ' हवस ' - © ब्रह्म राक्षस
सुनो राम !
क्या दे सकते हो
एक वरदान
अगर हां
तो भर दो
हमारे हृदयों को
ममता , प्रेम और वात्सल्य से
ताकि बिना भेद
और संकोच के
लगा सकें
नन्ही जानों को
कलेजों से
बचा सके इन्हें
उन शिकारी नजरों से
इंसान की खाल में दरिंदों से
जो खोजते हैं
' जिंदा ' जिस्म शरीर की भूख के लिए
और उन पिशाचों से
जो पाकर एक ' लाश '
मिटाने लगते हैं अपनी
राजनीतिक , वैचारिक और धार्मिक ' हवस ' - © ब्रह्म राक्षस
