Friday, June 20, 2014

आंकड़े

कीट पतंगे अब बहुत खुश रहते है  , विज्ञान उनके लिए अब किसी भगवान से कम नहीं है , देखिये न  कितनी सहूलियत हो गयी उन्हें , आखिर अब दिए - कुप्पी का स्थान बल्ब , सी ऍफ़ एल , एल ई डी ने ले लिया है । अब बिना जले बिना सुलगे वो मस्ती में उन्मुक्त होकर प्रकाश के साथ प्रकाश में खेल सकते हैं ... लेकिन वायरिंग , बोर्ड , होल्डर के पीछे छिपी छिपकलियाँ  अब जरूर गाहे बेगाहे उन्हें अपना ग्रास बना लेती हैं ... पर सहूलियत के लिए ' इतना तो चलता है ' । " साल के 1476 रेप / शोषण / उत्पीड़न के मामलो में 167 थानों में / पुलिस कर्मियों द्वारा हुए " के आंकड़ों पर  I.G. साहब ने भी तो यही कहा था उस दिन .... - ब्रह्म राक्षस ©

Monday, June 9, 2014

Network busy

देर तक काम था आज , तो आफिस से निकलते निकलते रात हो गयी , भैय्या को तीन बार फोन मिलाया तो Call ended .... Network busy  लिख कर आया । दो मिनट रुक के मिलाऊँगी सोच वो आफिस से सड़क पर आई ही थी कि घर के लिए ऑटो मिल गया । लेकिन वो कभी घर नहीं पहुँची अगले दिन उसकी लाश मिली सोने की चैन , अंगूठी , महंगा स्मार्ट फोन , कैश सब उसके पास था बस नहीं थे तो बदन पर पूरे कपड़े । शहर में आग लग गयी मोमबत्तियों की बिक्री बढ़ गयी खूब प्रदर्शन , बवाल और राजनीति हुई । आज घटना को हफ्ता भर होने जा रहा है , आज फिर दो जवां साँसे कानो से होते दिल में उतर रहीं हैं ... और जब रात की खामोशी में दिल की धड़कन फोन के रास्ते कानों में पड़ती तो दोनों एक दूसरे के आभास में बरबस सिमट के रह जाते। आज वो दोनों फिर उसी दिन की तरह अनलिमिटेड काल की नाव से रात के गहरे मौन सागर में प्यार का सफ़र तय कर रहे थे । और दूर कही फिर किसी को ' Call ended .... Network busy ' लिख कर आ रहा था । - © ब्रह्म राक्षस ( कौशल )

Sunday, June 8, 2014

देहाती औरत

सास कहे खा - तो खाती , सास कहे सो - तो सोती ,  सास कहे जाग - तो जागती ... सास कहे बोल - तो बस सर हिला देती ।  ऐसी आज्ञाकारी सेवक बहू कि पूरे गांव में मिसाल दी जाती पर शहर में ' इनके ' ममेरे ससुर के लड़के की शादी से जब से आई तब से बहुत उदास खोई खोई ...  असली बात क्या है किसी को कुछ पता नहीं क्या बात , पर उड़ती उड़ती सुनी है कि वहां बहू ने खूब काम किया जो बोला वो किया न सोने की फिकर न खाने की बस हुकुम बजाया पर जब नेग की बात आई तो साड़ी अहमदाबाद वाली को मिल गयी ... इसने पूछा कि ' हमें काहे नहीं मिली ? ' जवाब आया ' न तू कभी बोली न कभी आगे आई न कभी मुंह खोला .. तो कहाँ से कुछ मिलेगा ' .. सच ही है ' देहाती औरत ' को साड़ी भी नहीं मिलती ....© ब्रह्म राक्षस ( कौशल )