Sunday, June 8, 2014

देहाती औरत

सास कहे खा - तो खाती , सास कहे सो - तो सोती ,  सास कहे जाग - तो जागती ... सास कहे बोल - तो बस सर हिला देती ।  ऐसी आज्ञाकारी सेवक बहू कि पूरे गांव में मिसाल दी जाती पर शहर में ' इनके ' ममेरे ससुर के लड़के की शादी से जब से आई तब से बहुत उदास खोई खोई ...  असली बात क्या है किसी को कुछ पता नहीं क्या बात , पर उड़ती उड़ती सुनी है कि वहां बहू ने खूब काम किया जो बोला वो किया न सोने की फिकर न खाने की बस हुकुम बजाया पर जब नेग की बात आई तो साड़ी अहमदाबाद वाली को मिल गयी ... इसने पूछा कि ' हमें काहे नहीं मिली ? ' जवाब आया ' न तू कभी बोली न कभी आगे आई न कभी मुंह खोला .. तो कहाँ से कुछ मिलेगा ' .. सच ही है ' देहाती औरत ' को साड़ी भी नहीं मिलती ....© ब्रह्म राक्षस ( कौशल )

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