Hostel campus B ब्लाक ऊपरी मंजिल का बाएं किनारे से दूसरा कमरा , C-11 , ऊपरी मंजिल तो दूर B ब्लाक़ में रहने को मजबूरी में ही कोई तैय्यार होता था । क्योंकि वहां भूतनी ( यही नाम दिया था लोगों ने उसे ) अब भी रहती है और अक्सर देर रात अँधेरे में C-11 के बाहर बरामदे में और कभी बालकनी में , चैनल के पीछे , वाटर कूलर के पास वो अकेला साया दिख जाता है , रूह काँप ऊठती है लोगों की उसे देखते ही , वीभत्स अभिशप्त चेहरे की ऐसी दहशत थी कि डर लोगों की हड्डियों में घुस कर उन्हें मोम बना चुका था किसी में इतनी हिम्मत नहीं कि उसके पास फटक सके। ऐसा नहीं था कि उसे हटाने के प्रयास नहीं किये गए बहुत किये गए ... हर संभव प्रयास किये गए पर वो हटती ही नहीं थी बस भरभराती आवाज में गीता सुनाती है कहती है ' वो अभी मरी नहीं है , ज़िंदा है अभिशप्त वीभत्स अकेली होकर भी वो अभी जिन्दा है , चेहरा वक्ष और हाथ जलाए हैं तेज़ाब ने आत्मा नहीं ' .. हां आप सही समझे " नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि ...... " । - ब्रह्म राक्षस ©
.............कब यहां अमर विस्वास , अमिट है कब आस्था ? बस एक शून्य जिसमें होता सब कुछ विलीन , आबद्ध परिस्थिति - मनोवृत्ति की सीमा से , मै जो लिखता वह सब कितना अर्थहीन !
Thursday, May 29, 2014
भूतनी
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लघुकथा
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