Tuesday, August 7, 2012




त्याग , संयम कर्मठता
बैनर पोस्टर पर लिखने से
नहीं आती
वो उस कमीज में है
जो सर्दी में
पसीने से भीग जाती
बारिश में बदन की गर्मी
तुरंत से सूख जाती

सीमेंट की बोरी वाले झोले में
वो ’ वानप्रस्थ ’ लाता है
कपडे मे लिपटी रोटियां
सबसे ऊपर की रोटी से
ढंका नमक , मिर्च और
प्याज की बोटियां
और टाट जडित, फ़ेंकी हुयी
शीतल पेय की बोतल
मे भरा पानी

नहीं परवाह उसे बारिश
धूप सर्दी या कोहरे की
कहता है वो कि
उसे आदत है इस सब की
सुख सुविधा की
महत्वाकांक्षा से विहीन
ध्येय के प्रति तल्लीन
मान सम्मान की
अपेक्षा - आकांक्षा से परे
वो अनवरत जुट जाता है
अपने कर्म अपनी पूजा में

अच्छा  ’ मलंग ’  तो वो पुजारी है ??
हां !! सबसे बडा पुजारी
क्योंकि उसकी पूजा
निश्चित करती है
सैकडों हजारों जनों की सुरक्षा ....
चिलचिलाती धूप मे
हाड गलाती ठंड मे
जब वातानुकूलक के सामने से
हटने का मन नहीं करता
उसका घन पटरियों पर
सतत चलता
क्यों कि ये उसके लिये
कार्य नहीं , व्यवसाय नहीं
है तो सिर्फ़ पूजा ...
है तो सिर्फ़ पूजा ॥ ©