Sunday, August 9, 2015

पहचान


दिन, हफ्ते, महीनों से गुजरते हुए सम्मान की उनकी लड़ाई अब सालों तक पहुँच चुकी थी । कभी लगता कि जीत सामने है तो कभी वो आसमान का तारा बन जाती फिर भी सब पूरी प्रतिबद्धता , जीवट  से लगे हुए थे  लेकिन एक दिन अचानक उन्होंने अपनी पहचान बदल ली ' 100 परिवारों ने धर्म बदला ' की खबर 22 सालों में पहाड़ कटने की कहानी को भोथरी कर चुकी थी और शायद एक नया गणित समझा रही थी कि 100 में दो शून्य नहीं 99 शून्य होते हैं । - ब्रह्म राक्षस ©

Thursday, July 23, 2015

अंत्येष्टि


5000 साल, तुलसी, मनु, द्रोणाचार्य, धर्मशास्त्र  उनकी प्रबुद्धता के क्षिति  जल पावक गगन समीर थे । आरक्षण से पाई नौकरी और प्रमोशन के बदले वो समाज में जातिगत भिन्नताओं को समाप्त करने का जाप किया करते थे । ' रोटी - बेटी में जातीय बाध्यताएं समाप्त होंगी तभी समाज से जातिवाद हटेगा, सामाजिक परंपराएं टूटेगीं ' नियम से दिन में पांच बार ये कहते थे । पर इधर एक हफ्ते से उनकी कोई खबर नहीं... उनके लाख समझाने के बावजूद कि ' उसका कोई भविष्य नहीं और आरक्षण का लाभ भी न मिलेगा ' उनकी एकलौती बेटी ने अपने सवर्ण प्रेमी से विवाह का निश्चय कर लिया .... उनकी प्रबुद्धता की अंत्येष्टि अगले माह की 8 तारीख को है , और वो चाह कर भी इस बात पर खुश नहीं हो सकते कि सामाजिक परम्पराओं को तोड़कर उनकी बेटी ही ये करेगी ..... - ब्रह्म राक्षस ©

Wednesday, July 15, 2015

पुजारी

ऑस्कर ले गया ये, ऑस्कर मिलना चाहिये इसे , सदी का सबसे बेहतरीन अभिनेता है ये ' बस यही कहा जा रहा था 22 वर्ष के संघर्ष, परिश्रम, त्याग, लगन , प्रेम और जीवट की सत्य घटना पर आधारित फ़िल्म के ट्रेलर लांच पर...... और दूर कहीं टूटे काटे जीते हुए भगवान फिर से पत्थर में बदल रहे थे , अब उनके पास पुजारी आ गया था .... - ब्रह्म राक्षस (कौशल)

Saturday, February 14, 2015

सवाल

बिना मडगार्ड बिना पैडल की साइकिल के डंडे पर बैठी  नन्ही सी जान आज बहुत खुश थी ... प्लास्टिक का बैट बाल जिसकी चाहत ने उसे पिछले महीनों में कई बार उसे पिटवाया, रुलाया था आज पूरी हो गयी थी .. बाप - बेटे चहकते बतियाते जा रहे थे  लेकिन फिर अचानक बाप चुप हो गया .. मासूम ने बस इतना ही पूछा था ' बापू तू रोज गुलाब क्यों नही बेंचे ? ' " - ब्रह्म राक्षस ©

बदलाव

हाँ तो बात उस दिन की है ..  जब प्रस्तोता ने नए बनाये पकवान परसने सरीखे उल्लास और उत्साह से कहा  '...अब देखिये विजयी पार्टी के प्रमुख प्रवक्ता का विजय के बाद सबसे पहला और एक्सक्लूसिव साक्षात्कार ' इतना सुनना था कि  मुझे अलग रख दिया गया .. मैं खुश था क्योंकि जिस विश्वास स्थायित्व और सुकून की तलाश मुझे हमेशा से थी मेरे जीवन में आते हुए से लग रहे थे । लेकिन उस पहले सवाल के जवाब पर प्रवक्ता ने जैसे ही कहा ' हिंदी के सबसे अधिक व्यस्ततम और लोकप्रिय कवि होने के नाते 'मेरी '... ' मुझे झठ से उठा लिया गया .. स्थायित्व , सुकून और ' विश्वास ' ओझल हो चुके थे और एक निराशा लिए उन हाथों से ' प्रोग्राम चेंज ' बटन फिर से बार बार दबाई जा रही थी । - एक रिमोट की आत्म कथा से ..... - © ब्रह्म राक्षस