हाँ तो बात उस दिन की है .. जब प्रस्तोता ने नए बनाये पकवान परसने सरीखे उल्लास और उत्साह से कहा '...अब देखिये विजयी पार्टी के प्रमुख प्रवक्ता का विजय के बाद सबसे पहला और एक्सक्लूसिव साक्षात्कार ' इतना सुनना था कि मुझे अलग रख दिया गया .. मैं खुश था क्योंकि जिस विश्वास स्थायित्व और सुकून की तलाश मुझे हमेशा से थी मेरे जीवन में आते हुए से लग रहे थे । लेकिन उस पहले सवाल के जवाब पर प्रवक्ता ने जैसे ही कहा ' हिंदी के सबसे अधिक व्यस्ततम और लोकप्रिय कवि होने के नाते 'मेरी '... ' मुझे झठ से उठा लिया गया .. स्थायित्व , सुकून और ' विश्वास ' ओझल हो चुके थे और एक निराशा लिए उन हाथों से ' प्रोग्राम चेंज ' बटन फिर से बार बार दबाई जा रही थी । - एक रिमोट की आत्म कथा से ..... - © ब्रह्म राक्षस
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