Thursday, July 23, 2015

अंत्येष्टि


5000 साल, तुलसी, मनु, द्रोणाचार्य, धर्मशास्त्र  उनकी प्रबुद्धता के क्षिति  जल पावक गगन समीर थे । आरक्षण से पाई नौकरी और प्रमोशन के बदले वो समाज में जातिगत भिन्नताओं को समाप्त करने का जाप किया करते थे । ' रोटी - बेटी में जातीय बाध्यताएं समाप्त होंगी तभी समाज से जातिवाद हटेगा, सामाजिक परंपराएं टूटेगीं ' नियम से दिन में पांच बार ये कहते थे । पर इधर एक हफ्ते से उनकी कोई खबर नहीं... उनके लाख समझाने के बावजूद कि ' उसका कोई भविष्य नहीं और आरक्षण का लाभ भी न मिलेगा ' उनकी एकलौती बेटी ने अपने सवर्ण प्रेमी से विवाह का निश्चय कर लिया .... उनकी प्रबुद्धता की अंत्येष्टि अगले माह की 8 तारीख को है , और वो चाह कर भी इस बात पर खुश नहीं हो सकते कि सामाजिक परम्पराओं को तोड़कर उनकी बेटी ही ये करेगी ..... - ब्रह्म राक्षस ©

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