देर तक काम था आज , तो आफिस से निकलते निकलते रात हो गयी , भैय्या को तीन बार फोन मिलाया तो Call ended .... Network busy लिख कर आया । दो मिनट रुक के मिलाऊँगी सोच वो आफिस से सड़क पर आई ही थी कि घर के लिए ऑटो मिल गया । लेकिन वो कभी घर नहीं पहुँची अगले दिन उसकी लाश मिली सोने की चैन , अंगूठी , महंगा स्मार्ट फोन , कैश सब उसके पास था बस नहीं थे तो बदन पर पूरे कपड़े । शहर में आग लग गयी मोमबत्तियों की बिक्री बढ़ गयी खूब प्रदर्शन , बवाल और राजनीति हुई । आज घटना को हफ्ता भर होने जा रहा है , आज फिर दो जवां साँसे कानो से होते दिल में उतर रहीं हैं ... और जब रात की खामोशी में दिल की धड़कन फोन के रास्ते कानों में पड़ती तो दोनों एक दूसरे के आभास में बरबस सिमट के रह जाते। आज वो दोनों फिर उसी दिन की तरह अनलिमिटेड काल की नाव से रात के गहरे मौन सागर में प्यार का सफ़र तय कर रहे थे । और दूर कही फिर किसी को ' Call ended .... Network busy ' लिख कर आ रहा था । - © ब्रह्म राक्षस ( कौशल )
.............कब यहां अमर विस्वास , अमिट है कब आस्था ? बस एक शून्य जिसमें होता सब कुछ विलीन , आबद्ध परिस्थिति - मनोवृत्ति की सीमा से , मै जो लिखता वह सब कितना अर्थहीन !
Monday, June 9, 2014
Network busy
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लघुकथा
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