कीट पतंगे अब बहुत खुश रहते है , विज्ञान उनके लिए अब किसी भगवान से कम नहीं है , देखिये न कितनी सहूलियत हो गयी उन्हें , आखिर अब दिए - कुप्पी का स्थान बल्ब , सी ऍफ़ एल , एल ई डी ने ले लिया है । अब बिना जले बिना सुलगे वो मस्ती में उन्मुक्त होकर प्रकाश के साथ प्रकाश में खेल सकते हैं ... लेकिन वायरिंग , बोर्ड , होल्डर के पीछे छिपी छिपकलियाँ अब जरूर गाहे बेगाहे उन्हें अपना ग्रास बना लेती हैं ... पर सहूलियत के लिए ' इतना तो चलता है ' । " साल के 1476 रेप / शोषण / उत्पीड़न के मामलो में 167 थानों में / पुलिस कर्मियों द्वारा हुए " के आंकड़ों पर I.G. साहब ने भी तो यही कहा था उस दिन .... - ब्रह्म राक्षस ©
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