Tuesday, September 16, 2014

दारोगा

शाम को मैदान से आने के बाद सीधे अपने कमरे में चला गया ,  नहा धोकर स्वाध्याय करने बैठ गया  , व्यस्तता परीक्षा के दिनों की तरह खाना भी अपने कमरे में लाकर खा लिया । फिर सुबह रोज की तरह व्यायाम नित्य कर्म करके अखबार नाश्ता भी बाहर बरामदे में कर लिया । चुपचाप कचहरी को निकलने वाला था कि वो उम्र दराज , चश्मा लगा चेहरा जिसके सामने मैं कल शाम से नहीं आया था दरोगा के जैसे बोल उठा ' दाईं आँख को क्या हुआ छोटी छोटी सी क्यों लग रही ... इधर आ जरा ' । अब झूठ फिर हकला रहा था ' म्म म्म माँ कुछ नहीं हुआ ' । - ब्रह्म राक्षस ©

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