नेता जी की चुनावी सभा थी । व्यवस्था हो रही थी विकास सड़को के गड्डे भर रहा था , रोशनी सभा स्थल पर लगे जनरेटर्स से ईंधन पी रही थी , पूंजी निवेश मंच में एसी कूलर लगा रहा था , गरीबी बसों गाड़ियों में भर भर लाई जा रही थी , अशिक्षा पूड़ी सब्जी के पैकेट बना रही थी और स्वास्थ्य टेंट से दूर खड़ी दो गाड़ियों में भरी बोतल पाउचो की रखवाली कर रहा था । इन्फ्रास्ट्रक्चर बड़े से मैदान के एक छोटे से हिस्से को छाया दे रहा था । फिर मंत्री जी आये धर्मनिरपेक्षता - साम्प्रदायिकता - जातिवाद ...... हुंकार - टंकार , माला - मुकुट , तलवार - गदा बन कर छाये रहे और सभा समाप्त हुई हुई । अगले दिन में बिके हुए सच में सबसे ऊपर बड़ी लिखावट और 20-25 पंक्तियों में छपा था ' भारी जन समूह - सफल सभा ' जिसकी नीव में थे क़त्ल , लूट , बलात्कार और बेरोजगार की आत्म हत्या के कुछ्ले दबे हुए 4 पंक्ति के सच । - ब्रह्म राक्षस ©
No comments:
Post a Comment