कमाऊ पति की पत्नी और दो प्यारे गोल मटोल बच्चों की माँ थी । लेकिन जब वो मिला तो सब भूल गई ... प्रेम में पड़ गयी अब न उसे घर की सुध रहती न द्वार की । और एक दिन लड़के ने उसे बुला ही लिया मिलने ... दोनों मिले , नजरे नज़रों में उतरीं , हाथों ने हाथ थामे फिर लडके ने उसको भविष्य दिखाया और भविष्य में था एक ' सिलवट भरा बिस्तर ' .. पहले बरसात और उसके बाद की धूप सी चटख हो गयी वो ... फ़नक कर ऐसे भागी जैसे कोई बुरा सपना टूटा हो । ... अब लड़का बंद अँधेरे कमरे में बैठा था किसी आशा किसी प्रतीक्षा किसी पश्चाताप में नहीं ... बस इस अनोखे सत्य के साथ कि ' अच्छाई पर कभी कभी बुराई भी जीतती है ' ... © ब्रह्म राक्षस
.............कब यहां अमर विस्वास , अमिट है कब आस्था ? बस एक शून्य जिसमें होता सब कुछ विलीन , आबद्ध परिस्थिति - मनोवृत्ति की सीमा से , मै जो लिखता वह सब कितना अर्थहीन !
Saturday, August 23, 2014
जीत
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लघुकथा
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