Tuesday, September 10, 2013

ट्रेन सरपट भागी जा रही । सामान्य श्रेणी के डिब्बे में राजनीति , धर्म , आध्यात्म , जीवन दर्शन , विज्ञान , खेल को समेटे एक खुली चर्चा चल रही थी । किशोर , युवा , वृद्ध , अधेड़ सब अपने अपने विचार रख रहे थे । खिड़की से बाहर शून्य में झांकता हुआ सा वो ... बीच बीच में हर विषय पर जानकारी पूर्ण और सटीक टिप्पणी कर देता ... ... इतने कम समय में ही उसकी योग्यता / विद्वता के सब कायल हो गए थे .. ऐसा लगने लगा कि कोई ऐसा विषय नहीं जिसका वह ज्ञाता न हो हर विषय पर बोल सकता था वो . फिर अचानक एक वृद्ध ने जिज्ञासावश पूँछ लिया कि - बेटा आप करते क्या हैं ? ...उसके पास कोई जवाब नहीं था । आखिर एक बेरोजगार जो था ....- मलंग ©

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