Friday, September 6, 2013

नई उम्मीद

न्यूज चैनल की वैन सरपट दौड़े जा रही थी । गांव जाकर रुकी आखिर रेल बजट में आज नई रेलवे लाईन की घोषणा हुई थी । गांव वाले भी खुश थे । पत्रकार सबसे पूँछ रहा था कि इस रेलवे लाइन से क्या उम्मीद आसरा लगाए हो । कोई यातायात की सुलभता बताता तो कोई कृषि व्यापार में बढ़ोत्तरी की । घुरई से पूंछा कि रेलवे लाइन पास हुई तुम क्या उम्मीद आसरा लगाए हो ? घुरई - बहुत आसरा लगाए हूँ बाबूजी । ठाकुर साहब के खेत में हगत हगत ( शौच करते करते ) बहुत दिन हुई गए अब रेल पटरी के किनारे आराम से करिहौं ....  ©

No comments:

Post a Comment