Friday, September 13, 2013

बस तुम्हारे लिए ...

 नहीं है मेरे पास बीघे 
एकड़ हेक्टेअर जमीन 
है तो बस
एक गमला जमीन 
तुम्हे लगाने के लिये ;

जानता हूँ तुम बढते हो
बिना जताए  बिना बताये 
सूख जाते हो इसीलिये शायद 
पर मैं 
सच की खुरपी से गहरा खोदूंगा
ताकि विश्वास रूपी जड़े 
अच्छे से विकसित हो पायें 
उसमें रख कर डालूँगा 
सपनों का पानी 
दूंगा तुम्हे स्थायित्व  
निरंतरता की धुप  
खड़ा होने के लिए दूंगा 
तुम्हे शरीर का संबल 
और जीवन रूपी समय 
बस बदले में 
मेरे गमले में जमा लेना 
अपने अस्तित्व की जड़े 
और पल्लवित हो जाना 
क्योंकि तुमसे 
फूल फल नहीं चाहिए 
खुशबू भी नहीं चाहिए 
तुम उससे भी बढ़कर 
दोगे मुझे कुछ... हाँ प्राण वायु  ।  © 

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