Wednesday, September 11, 2013

कुछ दिन से उसके मेसेज , काल्स आना बंद हो गए थे । वो फ़ोन करता तो काट दिया जाता ..। आज आफ़िस से छुट्टी ली हुई थी उसने ... रात में 12 बजे फ़ोन किया तो कोई रेस्पोंस नहीं मिला इसलिए सुबह सुबह गुलाब का पूरा गुच्छा ( उसे बहुत पसंद थे न ) लेकर उसके घर पहुँच गया उसे जन्म दिन विश करने ... दरवाजा खोलते ही वो बोली क्यों आये हो इतनी सुबह , पागल , यूं आर एन इडीएट , ए साईको . लोग सही कहते हैं . फॉर गाड्स सेक लीव मी एलोन खुद तो किसी लायक नहीं हो 10000 कमाते हो तुम्हारा खुद का कोई फ्यूचर नहीं है मुझे क्या दोगे ....गो टू हेल ... और दरवाजा बंद हो गया । न जाने क्यों वो अभी तक दरवाजे पर खड़ा था ... तभी अन्दर से आवाज आयी । हेलो सर ... थैंक्यू .. इतना लेट विश कर रहे हैं आप , आप से तो ऐसी उम्मीद नहीं थी ......... अच्छा अच्छा बहाने मत बनाइये ..... मेरी तीनो पोएम्स छाप रहे हैं न आप ? .......
 फूल वही रख कर वो चल दिया ... अन्दर के आख़िरी शब्द जो कानों में पड़े .... " हाँ बाबा उसी रोमांटिक नावेल पे ही काम कर रही हूँ " ....  ©

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