Sunday, September 8, 2013

-तिवारी जी गुड मार्निंग ..

- गुड मार्निंग मंसूरी साहब .. आज लेट कैसे हो गए ? 

- रात बेगम के भाई की बेटी को लेकर परेशान रहा ... मुजफ्फरनगर में है न वो जाकिया ...

- वहां के हालात तो बेहद खराब है , ज़ाकिया लोग ठीक तो हैं न ? 

- हां ठीक तो हैं ... पर आप तो जानते हैं न दंगे बड़े गहरे जख्म दे जाते ... सियासी खेल होंगे अब इस पर लोग भूलना चाहे तो भी जख्म कुरेदे जायेंगे बे वजह बेगुनाह परेशान होंगे 

- मंसूरी साहब ... जिस शहर में दंगे होते वहाँ बेगूनाह कोई नहीं ... लोग कहते है की दंगे सियासी लोग करवाते ... हम नहीं मानते । चार सफ़ेद पोश आये चार बातें की और आप चले एक दूसरे का कत्ले आम करने ... जनाब बड़े बुजुर्गों को चाहिए नहीं कि अपनी औलादों रिश्तेदारों को ये सब करने से रोकें ... सच पूछिए तो दंगो में ही शराफत और मोहब्बत की परीक्षा होती ... - मलंग ©.

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