चलो चलो सब ... जाम खुल रहा है । सबने चैन की सांस ली ; रात से जाम लगा था आखिर .. भूखे प्यासे थके लोगों में एक नई स्फूर्ति आ गयी . सब गाडियां निकलने की आपाधापी में लग गए । घटना स्थल पर दोनों ट्रक जिनका आपस में टकराव हुआ था एक तरफ पलटे पड़े थे ... उन्हें देख कर " पक्का साले दारूपीकर चला रहे होंगे , तभी लड़ गए , बड़े कमीने होते हैं ये ट्रक वाले , पूरी रात खराब हो गयी इनकी वजह से " - गुजरने वाला हर दूसरा आदमी यही कह रहा था ... वही सड़क के बाईं तरफ खून के छींटे से सने अख़बार में लिपटा ' बेबी सूट ' , एक तरफ लुढका हुआ टूट चूका लकड़ी का वाकर , उसके साथ ही जमीन पर पड़ा तीन घंटियों वाला झुनझुना जिसकी एक घंटी निकल चुकी थी ... अपनी किस्मत पे रो रहे थे . एक पिता के प्रेम , खुशी को व्यक्त करने से वंचित रह गये थे तीनो ...... ©
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