Friday, September 6, 2013

- एक लोहे की ग्रिल बननी है है
- बन जायेगी मास्टर साहब
- ये लो नाप 
- कितना खर्च आएगा 
- यही कोई 1500 रूपये 
- ठीक है मिलेगी कब 
- कल मिल जायेगी 
- ठीक है मैं कल आऊँगा कुछ एडवांस चाहिए
- कल ही ले लूंगा मास्टर साहब 
- ठीक है
- मास्टर साहब चाय पिए जाईये 
- नहीं तुम लोग पियो 
- अरे मास्टर साहब पी लीजिए अब आ गयी है ।
 मास्टर जी ( हसते हुए ) - पैसे के मामले में गणित सही है तुम्हारी पर चाय के मामले में गड़बड़ा गयी । चाय चार गिलास ही हैं और मुझे मिला कर पांच लोग .. वैसे भी आर्डर तुमने मेरे आने से पहले दिया फिर मेरे लिए चाय कैसे आयेगी ?
- मास्टर जी पैसों में व्यापार वाली गणित लगाता और चाय में सत्कार वाली ... हम चारों तीन की चार कर लेंगे आप पूरी ले लीजिये ..... - मलंग 

©

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