शुक्रवार था , शाम होने को थी फिर भी भीड़ थी गल्ला मंडी में। सरकारी अनाज के ट्रक जो आयेंगे । 5 रुपया बोरी उतराई लेने वाले मजदूर खड़े थे भोला भी था । ट्रक आया सब बोरियां उतारने में लग गए । सुपरवाईजर का फ़ोन बजा ... सुपरवाईजर बोला - हेलो ... जी सर ठीक है 10 - 10 करवा दूंगा । सर हमारा भी ध्यान रखिएगा पिछली बार सूंघने भर को भी नहीं मिल पाया था । हा हा हा एक लम्बी हँसी के बाद फ़ोन बंद हो गया ।
फिर सुपरवाईजर की धमकाती हुई सी आवाज आयी - सुनो हर ट्रक से 10 - 10 बोरी बचा के छोटे गोदाम में रख देना । ऐसा ही किया गया ... पैसे लेकर सब चले गए तो भोला ने अकेले में सुपरवाईजर से कहा - बाबूजी थोडा गल्ला मिल जाई का रात हुई गयी है अब दुकान सब बंद हुई गयी .... गाडी के शीशे में अपना चेहरा अस्त करने से पहले सुपरवाईजर बोला - हराम का माल है , 200 रुपया पा तो गए हो ... साला तुम लोगों का कभी पेट नहीं भरता तभी गरीब हो । ....
कृत्रिम रोशनी की चमक में भोला को शीशे में अपना प्रतिरूप दिखा ही था कि गाड़ी फुर्र हो गयी .. .....
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फिर सुपरवाईजर की धमकाती हुई सी आवाज आयी - सुनो हर ट्रक से 10 - 10 बोरी बचा के छोटे गोदाम में रख देना । ऐसा ही किया गया ... पैसे लेकर सब चले गए तो भोला ने अकेले में सुपरवाईजर से कहा - बाबूजी थोडा गल्ला मिल जाई का रात हुई गयी है अब दुकान सब बंद हुई गयी .... गाडी के शीशे में अपना चेहरा अस्त करने से पहले सुपरवाईजर बोला - हराम का माल है , 200 रुपया पा तो गए हो ... साला तुम लोगों का कभी पेट नहीं भरता तभी गरीब हो । ....
कृत्रिम रोशनी की चमक में भोला को शीशे में अपना प्रतिरूप दिखा ही था कि गाड़ी फुर्र हो गयी .. .....
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