मंदिर में रोज दो दिए जलाना उसका नियम था । एक दिन पुजारी पूँछ बैठे क्यों ये दो दिए जलाने का क्या तुक है ? सभी तो एक ही जलाते है । बिना कुछ कहे मुस्कुराकर कर चला गया वो । ( सुना था उसने कि किसी के लिए कुछ मांगो तो किसी पर जाहिर मत होने दो । ) उपेक्षित किये जाने के बाद भी चुपचाप उसकी क्लास में जाकर उसे देख आता था वो । बिना कुछ कहे बिना उसके सामने आये । उसे खिलखिलाता , हँसता , सफल देख कर उसके चेहरे पर एक मुस्कान आ जाती । बस इतना ही तो वो चाहता था । आखिर प्रेम करना उसने प्रेम कहानियों से ? गीतों से ? व्यक्तियों से नहीं इयरपीस से से सीखा था । .... जब साथ रहो तो एक दुसरे में पूर्णतः संलग्न रहो और जब कभी अलग भी हो तो एक दूसरे के पूरक बनकर जीवन में संगीत घोलते रहो । - कौशल ©
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