पहले मैंने
तुम्हे दिए
अपने शब्द ,
फिर अर्पित किया
अपना चिंतन ,
फिर अपनी आस्था भक्ति और विश्वास
फिर अपनी मुस्कान और दिन
और अब निछावर कर रहा हूँ
तुम पर अपनी राते ,
नींद और सपने ।
जानता हूँ
बदले में कुछ नहीं मिलेगा ।
पर कम से कम मत मांगना
मुझसे मेरी साँसे
वो दो जोड़ी बूढ़ी
आसराई आँखों की अमानत हैं ... ©
तुम्हे दिए
अपने शब्द ,
फिर अर्पित किया
अपना चिंतन ,
फिर अपनी आस्था भक्ति और विश्वास
फिर अपनी मुस्कान और दिन
और अब निछावर कर रहा हूँ
तुम पर अपनी राते ,
नींद और सपने ।
जानता हूँ
बदले में कुछ नहीं मिलेगा ।
पर कम से कम मत मांगना
मुझसे मेरी साँसे
वो दो जोड़ी बूढ़ी
आसराई आँखों की अमानत हैं ... ©
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