Saturday, September 7, 2013

सरकारी खजाने में गबन के कारण पिता जेल में था चौराहे पर उसका लड़का सुनील फल का ठेला लगाने लगा था । शर्मा जी हर रोज आते और एक किलो सेव ले जाते । न बरसात की चिंता न गरमी की , न कोई मोल भाव , न कोई बात बस सेव तुलाते ले जाते छः महीने से ऊपर हो गए थे । पर 10 दिन हो गए सेव लेने वो नहीं आये । फिर अचानक एक दिन 18-19 साल का लड़का आया सुनील को एक हजार के नोट की 2 गड्डी दी और बोला - पापा ने देने को कहा था । तुम्हारे पिता का कर्ज था उन पर , पापा की गवाही के कारण ही उन्हें सजा हुई । सुनील का चेहरा तमतमा उठा । आँखे लाल हो गईं । रूपये की गड्डी को फेंकते हुए वो लड़के का गिरेबान झकझोरता हुआ बोला - तो वो तेरा बाप था ? कौन था वो ? वो कमीना खुद क्यों नहीं आया ? लड़का - (गहरी सांस लेते हुए ) वो अब इस दुनिया में नहीं है । लाल बाईक से जिसपे ' रोहित ' लिखा था सेव लेने आते थे वही थे .... सुनील के हाथों से गिरेबान छूट गया और लाल आँखों में पानी और अविश्वास उत्पन्न हुआ और मुंह से अनायास ही निकल पड़ा - अरे नहीं .. कैसे ? ( निरंतरता से बने सम्बन्ध भी प्रेम की तरह प्रगाढ़ होते है ) ©.

No comments:

Post a Comment