Sunday, September 8, 2013

' नमस्ते ... अपनी बात किस तरह कहूं समझ नहीं आ रहा । बस ये जान लीजिये कि रोज रोज आपकी प्रोफाईल देखता हूँ । आपकी प्रोफाईल पिक्चर ओपन है उसे निहारता रहता हूँ । जानती हो आपके कवर पर लगे चित्र में जैसे अँधेरे में चाँद चमक रहा है । ठीक वैसे ही आपके मुस्कुराते चेहरे में आपकी आँखे चमकती हैं । आपकी प्रोफाईल में आपके रोज रोज आपके वही वर्क प्लेस , वर्क पोस्ट पढता हूँ लेकिन फिर भी उमंग से भर जाता हूँ । आपका सानिध्य चाहता हूँ । आपको सोचता हूँ । आपसे बातें करना चाहता हूँ । आपको जानना चाहता हूँ ? क्या आप मेरी ' तुम ' बनेंगी ? ' लिखा और साथ में ' कई बार यूं भी देखा है ' गीत का वीडियो अटैच किया लेकिन send बटन दबाने से पहले ही उसे याद आगई उसे अपने अतीत के कुछ सच ... जो शायद 'सभ्य' समाज में स्वीकार्य नहीं होंगे और जिन्हें छिपाने को उसकी अंतरात्मा कभी नहीं कहेगी । क्योंकि आत्मा पर झूठ का बोझ बहुत भारी लगता है ..... - मलंग 

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