जानती हो
अब मैं होना चाहता हूँ
लालची , लोभी , स्वार्थी
समेट लेना चाहता हूँ
तुम्हारी पूरी दौलत
वो दर्द
वो बेबसी
वो अकेलाप
न सिसकती रातों के
टूटे हुए ख़्वाब
तपाते आंसुओं में बह चुके
अरमानों की स्मृतियाँ
जिन्हें तुम सहेजे रखे हुए थी
बरसों से
बिना बताये बिना जताए
खाली कर दो अपना कोश
क्योंकि फिर बसाने है मुझे इनमे अरमान
भरने है मुझे इसमें बहुत से सपने ,
अनगिनत आशाएं
और थोडा सा मैं ..©
अब मैं होना चाहता हूँ
लालची , लोभी , स्वार्थी
समेट लेना चाहता हूँ
तुम्हारी पूरी दौलत
वो दर्द
वो बेबसी
वो अकेलाप
न सिसकती रातों के
टूटे हुए ख़्वाब
तपाते आंसुओं में बह चुके
अरमानों की स्मृतियाँ
जिन्हें तुम सहेजे रखे हुए थी
बरसों से
बिना बताये बिना जताए
खाली कर दो अपना कोश
क्योंकि फिर बसाने है मुझे इनमे अरमान
भरने है मुझे इसमें बहुत से सपने ,
अनगिनत आशाएं
और थोडा सा मैं ..©
No comments:
Post a Comment