Sunday, September 15, 2013

खाली जेब ....

चौबे के यहाँ से पान खा के जैसे ही चलने को हुआ एक मासूम सी आवाज आई - ' बाबूजी जूता पालिस कर दें ' मुड़ कर देखा तो 13-14 साल का लड़का खड़ा था काफी टाईट पेंट और थोड़ी बड़ी शर्ट पहने । ( किसी से मिले ही लगते थे ) 
- कै पैसे लोगे ?
- 5 रूपया 
- इतने ज्यादा ? तुम तो बड़े ठग निकले ( हंस कर कहा )
- जादा नहीं है बाबूजी , जूता बिलकुल चमका दूंगा 
- अच्छा चलो ठीक है 
 पान वाले के स्टूल पर बैठ गया और जूते दे दिए उसको । झोले से पालिश और ब्रश निकाल कर वो अपने काम में लग गया । इधर चौबे कहने लगा तिवारी जी मेहनती लड़का है । बाप रिक्शा चलता था कई रोज हो गए कोई कार चढ़ा दिया तब से लाचार हो गया बेचारा , महतारी बाप दो बहन और ये है । दो तीन रोज से आ रहा है । मैंने कहा ऊंची जात के हो पालिश करोगे कि स्टेशन में , गाड़ियों पान मसाला बेचोगे ? बोला - मुझे पैसा जोड़ना है पान मसाला बेचते बेचत खाब आई गया तो .. पालिस कर लूँगा । .... उसकी कहानी सुनता जा रहा था और उसके काम को देखता जा रहा था । नौसिखिया था , पर था मेहनती उसी आस्तीन से जूता और उसी से माथे का पसीना पोंछता जाता था । पालिश हो गयी थी फिर भी आस्तीन रगड़े जा रहा था ..... आखिरकार मैंने ही रोका उसे , जूते पहन कर ' ये लो 10 रूपये मेरे पास खुले नहीं है 5 बाद में दे देना ' मै चल दिया । वो बोला - अभी देता हूँ बाबूजी ... मैं मुड़ा और मन में आया कि कह दूं कि रख ले लेकिन तब तक उसकी छोटी हथेली में 5 का पालिश लगा सिक्का मेरे सामने चमक रहा था ।  

शाम को जब लौट कर आया तो वो वही बैठा अखबार पढ़ रहा था । बड़ा अच्छा लगा । मैंने पूंछा कितने तक पढ़े हो ? स्वर में निराशा लिए वो बोला - 6 में पढ्ता था ... और चुप हो गया । मैंने पूंछा पढना अच्छा लगता है ? उसके ' हाँ ' आँखों और मुस्कान में जो एकरूपता थी वो सीधे ह्रदय में लगी मैंने मन में ठान लिया कि सोमवार को इसकी पढाई की व्यवस्था करूंगा और परिवार में कुछ पैसे आयें उसकी भी .... 

आज सोमवार था ... चौबे पान लगा रहा था और मेरी नजरें उसे खोज रहीं थी । 
चौबे - का हुआ तिवारी जी ? 
 - वो लड़का नहीं दिख रहा आज 
चौबे - वो सेठ साहब है न पेट्रोल पम्प वाले वो ले गए उसको कह रह थे मेहनती लड़का है दिल्ली में बहन के घर नौकर नहीं है तो काम करने भेजेंगे .... 
समझ नहीं आ रहा था किसे कोसूं खुद को या नियति को ... सोच में डूबा था तभी
तिवारी जी ... तिवारी जी ... का हुआ ? ये लीजिये पान चौबे बोला ...
पैसे देने को जेब में हाथ डाला और चौबे को दिया  वो वही 5 का सिक्का था , महज एक 5 का सिक्का। पर आज पूरी जेब खाली लग रही थी - मलंग ©


No comments:

Post a Comment