Friday, September 6, 2013

कुलीनता

आपका ये साईकिल प्रेम कब बंद होगा ( वन्दना झल्ला कर बोली )

अब क्या हुआ अब किसने क्या कह दिया - विनोद बोला

किसने ? अरे पूरी कालोनी ने मजाक बना रखा है । बाई बता रही थी सेठी साहब कह रहे थे कि पेट्रोल के पैसे तक नहीं हमारे पास गरीबी आ गई हमारे - वन्दना बोली 

विनोद - हा हा हा

वंदना ( सब्जी काटते हुए )- हां आप तो हंस कर आफिस चले जाओगे और यहाँ मेरी दिन भर हंसाई होती है । आपको तो याद दिलाना पड़ता है उस दिन जब दूध लेकर आये थे तो वो वर्मा जी क्या कह रहे थे कि भाई साहब दो कैन बाँध लीजिये हम सबका भी दूध ले आया कीजिये । पर आपको तो कोई परवाह ही नहीं न अपनी इज्जत की न हमारी 

विनोद ( वन्दना के हाथों से चाकू लेते हुए ) - यार चाकू वाकू लेकर इतना गुस्सा मत किया करो डर लगता है । 

वन्दना - जाओ अब सब्जी काटने दो 

विनोद - वन्दना देखो सब्जी दूध ब्रेड खरीदने अगर एक दो किलोमीटर साईकिल से जाता हूँ तो उसमे नुकसान क्या है ? पर्यावरण प्रदूषण कम होता , व्यायाम भी हो जाता । पेट्रोल बचता सो अलग . ये तो समाज सेवा है.. बीस हजार के ट्रेड मिल पर दौड़ने से बेहतर है ये .... जो हंसते हैं उनमे आत्म विश्वास नहीं है इस सामाजिक आवश्यकता को समझने , स्वीकार करने का  ...ध्यान रखो कुलीनता खर्च करने दिखावा करने में नहीं होती । कुलीनता सदुपयोग में होती । - कौशल मलंग ©

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