तुम
मेरे लिए
न फूल हो
न कली
न बाग़ न उपवन
न नदी न झरना
प्रेम के प्रतीक जो मेरे
अग्रज दे गए हैं
उनमें से कुछ भी नहीं हो तुम
मेरे लिए
मेरे लिए
तुम हो
जगमगाने वाला
मन्दिर का दिया
दूर से ही सही
पर सुनाई देने वाली
घंटे की ध्वनि
तुम हो
मेरी आस्था की प्रतीक ... ©
मेरे लिए
न फूल हो
न कली
न बाग़ न उपवन
न नदी न झरना
प्रेम के प्रतीक जो मेरे
अग्रज दे गए हैं
उनमें से कुछ भी नहीं हो तुम
मेरे लिए
मेरे लिए
तुम हो
जगमगाने वाला
मन्दिर का दिया
दूर से ही सही
पर सुनाई देने वाली
घंटे की ध्वनि
तुम हो
मेरी आस्था की प्रतीक ... ©
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