चाय ... डिप चाय ... कह के चाय वाला गया ही था कि वो अधेड़ क्रीज पर अपना गागर में सागर रूपी झोला लिए किताबे बेचने आ गया । खचाखच भरे कूपे में जगह बनाना उतना ही मुश्किल था जितना सचिन द्रविड़ और गांगुली के दौर में किसी नए बल्लेबाज के लिए टॉप 3 में जगह बनाना । लेकिन आपके पास टाईमिंग शाट सेलेक्शन और प्रतिभा हो तो मौके तो मिल ही जाते हैं । विनम्रता की चाशनी में डूबे बॉस , दादा जी , आंटी जी , दीदी जी जैसे संबोधनों ने उसको खड़ा होने की जगह दिला दी । दादी दादा जी के सामने कल्याण अखंड ज्योति , अंकल के सामने इंडिया टुडे तहलका आउटलुक , आंटी के सामने गृह शोभा , उनकी तरुण कन्या के लिए मेंहदी डिजाइन पाक शास्त्र ... तो सबसे छोटे राजा बाबू के लिए सरस सलिल चम्पक राज कामिक्स दिखाना गेंद को उसकी मेरिट के हिसाब से खेलने का लाजवाब उदाहरण था उसे सफलता भी मिली । अब खिड़की से बाहर झाँक रहे उस युवक के सामने उसने मुस्कुराते हुए ' मनोहर कहानियाँ ' चमकाई उसने ... युवक के चश्मे से तरेरती आँखों को देख कर अति आत्मविश्वास में स्पिन को पढ़े बिना आगे बढ़ कर लाफ्टेड शॉट मारने के प्रयास में विकेट गवां कर वो आगे बढ़ गया था । ... ©
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