बड़े बेशर्म हो यार
तुम हर साल आ जाते हो ?
क्या मिलता तुम्हे हर साल आकर ?
रटे रटाये भाषणों में
नैतिकता के पाठ ,
देखे दिखाए नाटक ,
एक दिन का ड्राई डे ?
एक सरकारी छुट्टी और
पूरे दिन निर्बाध बिजली की आपूर्ति ?
बस इसीलिये आते हो ?
सुनो 2 अक्टूबर
तुम्हे सच के उस योद्धा की कसम
तुम अब मत आना
अब तब तक मत आना
जब तक कोई नोट गिरने
खोने , न मिलने से ज्यादा
झूठ बोलने का दुःख न मनाये .... ©
तुम हर साल आ जाते हो ?
क्या मिलता तुम्हे हर साल आकर ?
रटे रटाये भाषणों में
नैतिकता के पाठ ,
देखे दिखाए नाटक ,
एक दिन का ड्राई डे ?
एक सरकारी छुट्टी और
पूरे दिन निर्बाध बिजली की आपूर्ति ?
बस इसीलिये आते हो ?
सुनो 2 अक्टूबर
तुम्हे सच के उस योद्धा की कसम
तुम अब मत आना
अब तब तक मत आना
जब तक कोई नोट गिरने
खोने , न मिलने से ज्यादा
झूठ बोलने का दुःख न मनाये .... ©
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