Tuesday, October 15, 2013

मुझे नहीं भाते है 
क्रीज जमे परिधान 
चमकते जूते 
रोज एक सी आने वाली खुशबू
डीसेंट हेयर कट 
और एक चिपकी सी मुस्कान 

मुझे नहीं भाता है दृढ़ता
विचारधारा वाद ज्ञान की पगडंड़ियों 
पर रोज रोज चलना
मेरे लिए जीवन नहीं है बस 
जूते की एडियाँ घिसना 

शायद इसीलिये तुम पाओगे 
मेरे जूतों को कम घिसा पर
मिट्टी से गोबर से रेत से भरा 
तले में धसे कांटे 
जिनसे कभी खून था उभरा

हां मैं ऐसा ही हूँ 
उधडी हुई नेकर पहने 
गालों पर बहे आंसू के निशान लिए
छिले हुए घुटनों के साथ 
फिर से खेलने जाने की जिद करते बच्चे जैसा ... ©


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