Saturday, October 5, 2013

डायन

सारे गाँव में पीटते हुए निर्वस्त्र घुमाया कुछ टोने टोटके किये और फिर कहने लगे कि रत्ना के अन्दर की डायन को हमने मार दिया ( और शायद अपने अन्दर की इंसान को भी ) ... विक्षिप्त रत्ना अब तालाब के पास वाले ' डोम ' के बने झोपड़े में ही रहती थी । उस दिन गाँव में हल्ला उठा कि रत्ना तालाब में डूब कर मर गयी । सारा गाँव इकठ्ठा था । जल कुम्भी में फंसी रत्ना और 8 साल सीमा की लाश निकाली जा रही थी । डायन जाते जाते एक को और खा गयी ' जन वाक्य ' बना हुआ था ये । क्रोध और हो हल्ले में एक दबी सिसकी मासूम आवाज आ रही थी ' बा ने ( उसने ) पानी में ते मोय निकारो ( मुझे निकाला ) ' शोर सन्नाटे में बदल गया। माँ ने उसे कभी न अलग करने के भाव से कलेजे से चिपका लिया और वो मासूम आवाज भी शांत हो गयी । अब सन्नाटे के रूप में एक प्रश्न आ खड़ा था जिससे वो सब पीछा छुडाना चाहते थे  ' डायन को तो पहले मार दिया था फिर आज ये कौन मरा ? इंसान / औरत या कोई और ? ' ..... ©

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