Sunday, October 20, 2013

आज साहित्य के क्षेत्र में सबसे बड़ी त्रासदी यह है कि अब लोगों की समस्याओं का आत्मा या भावना से कोई लेना देना नहीं रह गया है । अब सबके मन में सिर्फ एक ही सवाल है ' मैं कब मशहूर बनूँगा / बनूंगी ? ' जो भी युवा लेखक लेखिकाएं हैं वे अपनी इस चाहत के कारण खुद से द्वन्द कर रहे हैं । इसी द्वन्द में वे ज़मीनी हकीकत और इंसानी भावनाओं को भूल गए हैं । उन्हें एक बार फिर जीवन के शास्वत सत्य और भावनाओं के बारे में सीखना होगा , क्योंकि इसके बिना कोई रचना बेहतर नहीं हो सकती । कवि या लेखक की जिम्मेदारी बनती है कि वह ऐसा लिखे , जिससे पढ़ने वाले व्यक्ति के मन में साहस , सम्मान , उम्मीद और ज़ज्बा पैदा हो , जो उसे प्रेरित कर सके अपने जीवन की मुश्किलों के आगे डटे रहने और जीतने के लिए । - विलियन फाल्क्नर (10 दिसंबर 1950 को नोबल पुरुस्कार ग्रहण करते समय दिए गए भाषण का अंश । )

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