Thursday, October 10, 2013

न्यूज फीड पर सनी लियोन का फोटो चमक रहा था । एक मित्र ने लाईक किया हुआ था । फोटो पर क्लिक किया तो पाया उभारों और घुमावों को विशेष रूप से दिखाने का प्रयास था । अपनी अपनी आकांक्षाओं इच्छाओं और दावों को प्रकट करते हुए हजारों लाईक्स और सैकड़ों कमेंट्स थे । स्क्रीन टाईम आउट महज 15 सेकेण्ड का सेट था तो स्क्रीन ब्लैक हो गयी अब SMART फोन की DULL हो चुकी स्क्रीन पर चेहरा दिख रहा । ऐसा लगा प्रतिरूप कह रहा हो
- तुम भी तो किसीके इनबाक्स में ऐसे ही नियमित रूप से अपनी इच्छाओं आकांक्षाओं दावो को प्रकट करते हो ... 
- नहीं नहीं मेरा प्रेम शारीरिक नहीं है मैंने कब की प्रणय संबंधी याचना ?
- पर ये जैसे कर रहे तुम भी वैसे ही करते हो न .. मैं कैसे मानू ? 
 कहने वाला था कि मैं नैतिक हूँ पर रेम्बू याद आगये ' नैतिकता दिमाग की कमजोरी है ' ... मौन ताड़ कर प्रतिरूप बोला - बोलो बोलो ... चुप क्यों हो गए ? ... नीत्शे विनोबा कीट्स टैगोर सब याद आ रहे थे पर मौन थे शायद उनका मौन कह रहा था कि अपने सच के लिए हमारा इस्तेमाल क्यों करना चाह रहे हो । 
प्रतिरूप अग्नि सी कठोरता लिए बोला - ' अपने प्रेम का प्रमाण दो मुझे या उसे परेशान करना बंद करो । ' उस पल लगा स्वयं को ही स्वयं के सच का प्रमाण देने से बड़ी परीक्षा कोई नहीं हो सकती .... प्रतिरूप अभी भी मुझमे झाँक रहा था .....' सच को भी भला प्रमाण देने की आवश्यकता होती है ' सोचते हुए न जाने क्यों आँखों ' डूबने ' लगी ... आँखे बंद ही करी थी कि उसका ' पीली बिंदी वाला मुस्कुराता चेहरा ' चमक उठा । <डिंग> नोटिफिकेशन की आवाज आयी तो आँख खुली । प्रतिरूप स्मार्ट फ़ोन की ' प्रदीप्त ' हो चुकी स्क्रीन से गायब था और आज महीने भर बाद मैसेंजर एप पर उसका सन्देश था ... ' :) ' । ©

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