Monday, October 7, 2013

केमिकल लोचा

सफ़र में था खिड़की से बाहर झाकते हुए पेड़ो में खेतों में पहाड़ों में ' तुम्हे ' ही देख रहा । तभी एक आवाज आई ... अच्छा बताओ गांधी धोती क्यों पहनते थे ? .... नहीं पता ... अच्छा तुम बताओ ... तुम ... तुम ? तुम लोगों को नहीं पता चलो हम बताये देते हैं । दुसरे कोने में खिड़की के पास बैठी वो अधेड़ उम्र की शिक्षिका बोली । अपने पूछे प्रश्न का उत्तर देने के बाद गांधी नैतिकता धर्म समाज पर ज्ञान भी दिया । .... नाराज मत होना पर न जाने क्यों ' तुम्हारी ' जगह अब चरखा कातते गांधी ले रहे थे । खैर जब वो उतरने को हुईं तो पाया की चमचमाते हैण्ड बैग में च्विंगम लगी हुई । पेपर से साफ़ करने का प्रयास किया पर महज ' शारीरिक आकर्षण ' की तरह 'नहीं होती च्विंगम , जो छूट जाए ... आखिर सावधानी से बैग कंधे में टांगते हुए बोली ' पता नहीं क्यों च्विंगम खाते है ये लोग मुंह में छाले पड़ें इनके .... कैंसर हो जाए ' ... . न जाने क्यों अब गांधी   ©

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