रात के तीन बज रहे थे .... रुका तो नहीं था पर ब्लाकेज की वजह से धीमे हुए ट्रुक से वो वर्दी वाला लटक गया ... थोड़ी देर लटका रहा फिर कोशिश करके दरवाजे पर आया ही था कि जैक राड सर पर पडी , अगले ही पल वो जमीन पर और पिछले चारों पहियों ने उसको क्षत विक्षत लाश बना दिया ..... सुबह आस पास जुटी इंसानों की भीड़ ' साले दस दस रूपये के पीछे भागते है ये वर्दी वाले ... चढ़ा दिया होगा कोई ट्रक वाला ' यही कह रही थी .... और इस इंसानी शोर में मशीनी वायरलेस ' नंबर नोट किया जाए ट्रक यूं.पी. x xxxx ' बलात्कार और हत्या करके 3 अपराधी भागे है .... नंबर नोट किया जाए .... की आवाज आज दब गयी थी .... ©
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