Sunday, January 19, 2014

ईश्वर

अखंड मानस पाठ के उपरान्त आरती हुई , घंटे - घड़ियाल शंख की जोर दार आवाज बंद हुई , उद्घोष हुए ... ईश्वर मैले कुचैले कपड़ो में , कुछ दोनों हाथ फैलाए , कुछ गोदी में अपने सहोदर लिए मंदिर के बाहर जुटने लगे थे । ©‪ ‎

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