Tuesday, January 28, 2014

यकीन

उस फाटक के अन्दर प्रवेश किया तो वहां तीन युवक दो अधेड़ बैठे हुए थे ... सहम कर मैंने पूंछा ' 5 साल से कम का कोई बच्चा है क्या ? ' .. सर्दियों में हवा जैसे कपडे चीर कर शरीर में लगती ठीक उसी नज़र से मेरे शरीर को घूरते उस समूह से आवाज आई " 18 साल से ज्यादा उम्र के हैं सब .... हा हा हा हा " और उस सामूहिक ठहाके के पहले ' आपको कौन चाहिए ? ' किनारे वाला युवक फुसफुसाया ... ' मानसिक अपंगो के घर के शारीरिक अपंग ही भला ' ये सोच कर मुड़ी ही थी कि पार्श्व से ' दीदी !! दीदी !! ' चिल्लाता वो आया और झट से ड्राप पीकर ' thank you दीदी ' बोलकर बरामदे में खडी अपनी माँ के पास भागकर ' देखो पी आया दवा ' जताते हुए सा खड़ा हो गया । न जाने क्यों मुझे यकीन हो चला था कि ये बच्चा जीवन में अब कभी नहीं ' गिरेगा ' .... - कौशल 27-01-2014 ©

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