Tuesday, February 4, 2014

गिफ्ट

' जन्म दिन की ढेरों शुभकामनाये ' उस तरफ से आवाज आई । ' शुभकामनाएं एक ही चलेंगी अगर गिफ्ट ढेरों हो  ' -  बन्दर सी ढीठता के साथ मैं बोला ... सर्दियों की धूप जैसा सुखद एहसास था वो , जब उसने कहा ' अच्छा बताओ क्या चाहिए गिफ्ट में ? ' ... मन खिल उठा बस बोलने को था ' तुम ' ... लेकिन फिर याद आया वो तीन साल से कम्मिटेड है। ... मेरे मौन पर उसका बार बार बोलना ' बताओ न यार क्या चाहिए ?' अब जेठ की धूप बन चूका था , जिससे मैं और  न जाने कैसे कट चुकी उस लैंड लाइन काल की बीप बीप करती आवाज सरीखा धड़कता मेरा दिल झुलसे खड़े थे ... - कौशल 04-02-2014 ©

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