गोली बारूद की उस विनाश लीला के बीच आहत अर्ध चैतन्य जापानी सैनिक के मुंह में उस भारतीय सैनिक ने पानी डाला तो न जाने कब से प्यासे सैनिक में चैतन्यता लौट आई पर कृतज्ञता का भाव युद्धोन्माद से उपजे शत्रुत्व से न जीत पाया और उस जापानी ने भारतीय के शरीर में चाकू भोंक दी । अगले ही पल आसमान से एक आफत गिरी , धमाका हुआ और उसके बाद जब आँखे खुली तो रेडक्रास के अस्पताल में ... मरणासन्न जापानी के मुंह में विक्षत भारतीय ने इस बार पानी डाला तो भरी आँखों सुप्त मुस्कान से पहले वो इतना ही बोल पाया ' मुझे समझ आ गया बुद्ध भारत में ही क्यों जन्मे थे ' ... - समाचार पत्र में पढी एक बोध कथा ।
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