कचहरी के पास वाली चाय नास्ते की दूकान के बगल में वो लोगों का भविष्य बताता था । उसकी पिटारी में बंद सर्प शादी , नौकरी , शिक्षा , प्रेम , संपत्ति , स्वास्थ्य , विदेश यात्रा जैसे सवालों के जवाब बस हाँ और ना में देता था , लाल कपडे पर कुण्डली मारे तो उत्तर ' नही ' और हरे कपड़े पर कुण्डली से उत्तर ' हाँ ' होता था । कुछ एक भविष्यवाणियाँ सही भी निकलती , भीड़ भी लगती थी .. एक दिन किसी ने आकर ये साबित कर दिया कि सांप के पास इंसान सरीखी नज़र नहीं होती फिर क्या था सपेरे की धुनाई हुई और बिना ज़हर का सांप वहीं कुचल कर मर गया .. पता नहीं क्यों महीनों बाद वो सपेरा अब फिर आने लगा है दूकान में बैठे लोगों की चुनावी चर्चाएँ भविष्यवाणियाँ सुनकर विषभरी मुस्कान आती उसके चेहरे पर .. इस बार शायद उसे इन लोगों का भविष्य पता है ... - कौशल ©
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