Wednesday, November 13, 2013

क़र्ज़

                               मौसमी फल केले सिंघाड़े आम खीरे अमरूद बेचकर अनीस अपने परिवार का पेट पालता था । गुलाबी सर्दियाँ थी और वो अमरूद का ठेला सजा कर अगरबत्ती कर रहा था चौराहे पर तैनात पाण्डेय हवलदार आया और रोज की तरह 2-3 अमरूद छांटे और बोला ले काट के दे । अनीस के काट के नमक लगाए अमरूद उदारातीत करके पांडे आगे बढ़ा ही था पर आज अनीस बोला ' साहेब अभई बोहनी नहीं हुई कुछ तो देते जाईये ' पांडे ने घूर कर देखा और फिर जेब से 2 का सिक्का देते हुए चिर परिचित पुलिसिया अंदाज में बडबडाते हुए आगे बढ़ गया ।  

दोपहर ढलने को थी अनीस सड़क के उस पार लघुशंका करने गया ही था कि ठेले पर ग्राहक देख कर वापस लौटने को हुआ पर सड़क पर आते ही एक तेज रफ़्तार suv ने उसका काम तमाम कर दिया । .... महीने बीत गए पांडे अब निलंबित चल रहा । आखिर धमकी और लाखों के प्रलोभन के बावजूद भी उसने उस ' किशोर चालक ' को शिनाख्त परेड में पहचान लिया था । और तो और सुना है कि ' नमक ' का कर्ज़ उतारने वाले को आज कल बेटी की शादी के लिए क़र्ज़ नहीं मिल रहा ..... ©

No comments:

Post a Comment